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# Messages from the Buddha in Hindi

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पररचयबौद्धवभक्षुओंद्वारापूरेववश्वमेंएकअथिपूणिप्रण"वत्ररत्न"केरूपमेंप्रचाररतककयागयाहै।मैं’बुद्ध’कीशरणमेंिाताहाँ।मैं’धमि’कीशरणमेंिाताहाँ।मैं’संघ’कीशरणमेंिाताहाँ।बुद्ध:-शाक्यमुवन,िोककबुद्धकाहीएकऐवतहावसकतवरूप(आकार)है।तथावपबुद्धकेहॄदयनेिोभीअनुभवककयायामहसूसककयावही"प्रज्ञा"आिकासत्यहै।िोबुद्धकाआंतररकहॄदयहै,वहीबुद्धकेवशक्षणकाअवतारहै।धमि:-बुद्धद्वाराकदएगएउपदेशहीधमिहै।धमिहीतुम्हारेअंदरूनीसत्यकोसुनताहै।बुद्धकेउपदेशकाश्रवणकरहर्िऔरश्रद्धाकाअनुभवहोताहै,िोककसूत्रोंमेंवर्णितहै।संघ:-संघकीवाततववकताशाक्यमुवनकेचारोंओरववद्यमानवभक्षु-वभक्षुणी,उपासक-उपावसकाओंकासमावेशहै।बोवधसत्वकीअवतथाकोअपनाप्रयोिनबनाकरप्रत्यक्षआचरणकरनेवालेलोगोंकेसमूहकोहीसंघकहािानेलगा।बुद्धद्वारारचेगये“वत्ररत्न”,सभीवशक्षाएाँऔरधार्मिकएवंअध्यावत्मकवमत्रोंमेंववश्वासरखकर,तुमअपनेसंकुवचतहॄदयकोसत्यकेव्यापकसंसारमेंसभीअवधारणाओंमेंश्रेष्ठताकेसाथफैलासकतेहो।विससेसंपूणिसमझहीपररवर्तितहोसकतीहै।-1-─1─

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मानव-िीवनकाएकपहलूयुवारािकुमारकीवेदनाशाक्य-वंशीयक्षवत्रयवहमालयकीदवक्षणीउपत्यकामेंबहनेवालीरोवहणीनदीकेतटपरबसेहुएथे।उनकेगौतम-गोत्रीयकुलीनरािाशुद्धोधननेकवपलवततुकोअपनीरािधानीबनायाऔरवहााँएकववशालदुगिकावनमािणककया।रािाप्रिावत्सलथाऔरप्रिारािभि।एककदनरानीमहामायानेरातकोएकअनोखासपनादेखाककदवक्षणपाश्विसेएकसफेदहाथीउसकेगभािशयमेंप्रववष्टहोगयाऔररानीगभिवतीहोगई।उससमयकीप्रथाकेअनुसारप्रसूवतकेहेतुरानीनेअपनेवपतॄगॄहकेवलएप्रतथानककया।मागिमेंरानीनेलुवम्बनीवनमेंववश्रामककया।वहााँरािकुमारकािन्महुआ।वहयादगारकदनथा,वैशाखमासकीपूर्णिमा(अप्रैलमहीनेकी8तारीख)थी।रािाशुद्धोधनकीखुशीकाकोईपारनथा।उसनेबच्चेकानामवसद्धाथिरखा,विसकाअथिहै:सभीइच्छाओंकीवसवद्ध(पूर्ति)ककन्तुरािमहलमेंसुखकीओटमेंदु:खभीवछपाहुआथा,क्योंककथोड़ेहीकदनोंमेंरानीमायादेवीपरलोकवसधारगईं।तबरािपुत्रकापालण-पोर्णरानीकीछोटीबहनमहाप्रिापवतनेककया।सात(7)वर्िकाहोनेपररािकुमारकीवशक्षाकाआरम्भहुआ।वहनीवतशास्त्रऔररणकौशलसीखनेलगा।साथहीवहववश्वकीववसंगवतयोंपरभीवचन्तनकरतारहा।वसंतॠतुकेएककदनवहअपनेवपताकेसाथरािमहलकेबाहरघूमनेवनकला।एकखेतमेंउसनेककसानकोहलचलातेऔरहलकेफालसेउखड़करबाहरआएहुएएकछोटे-सेकीड़ेकोझपटकरलेिातीवचवड़याकोदेखा।यहदेखवहएकवॄक्षकीछायामेंिाबैठाऔरअतफुटतवरमेंसोचनेलगा।’हाय,क्यासबिीवएक-दूसरेकोमारडालतेहै।िन्मलेनेकेथोड़ेकदनोंबादहीमातॄववहीनरािकुमारनेिबिीव-िगतकायहमत्तयन्यायऔरलघुिीवोंकीअसहायताएवंदुदिशादेखी─-2-─

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तोरािकुमारवसद्धाथिकाहॄदयकदन-प्रवतकदनववदीणिहोतागया।यहदेखकररािाशुद्धोधनबहुतहीचचंवततरहनेलगेऔरवेरािकुमारकामनककसीतरहबहलाकरअन्यबातोंमेंलगानेकीकोवशशमेंिुटगए।िबरािकुमारउन्नीस(19)सालकेहुएतोरािानेउनकावववाहरािकुमारीयशोधराकेसाथकरकदया।दस(10)वर्िरािकुमारवसंत,वर्ािऔरशरदॠतुओंकेवलएअलग-अलगबनवाएगएमहलोंमेंसंगीत,नॄत्यऔरआमोद-प्रमोदमेंडूबारहा;ककन्तुबीच-बीचमेंिबभीवहमानव-िीवनकीसच्चाईसमझनेकीकोवशशकरतातोदु:खकीसमतयाउसकेसामनेमुाँहखोलेखड़ीहोिाती।“येरािसीववलास,यहतवतथशरीर,लोगोंकोआनवन्दतकरनेवालायहयौवन-अन्ततोगत्वामेरेवलएइनकाक्याअथिहै?कभीमनुष्यरोगीहोिाताहै,एककदनवॄद्धहोिाताहै,मॄत्युसेतोकभीबचनहींसकता।"िीवन-संघर्िमेंरतमनुष्यकोअवश्यमेवककसीमूल्यवानवततुकीखोिरहतीहै।उसकीखोिकालक्ष्यसहीभीहोसकताहैऔरगलतभी।अगरलक्ष्यकासन्धानगलतहैतोवहयहीमानेगाककरोग,बुढ़ापाऔरमॄत्युअपररहायिहैंऔरतबवहसहीमागिसेभटककरिोअवतथर,अतथायीऔरअशाश्वतहैउसीकोखोितारहेगा।""अगरउसकालक्ष्य-सन्धानसहीहैतोवहरोग,बुढ़ापेऔरमॄत्युकेयथाथिरूपकोसमझकरउसपरमसत्यकीतलाशकरेगा,विसेखोिकरसभीमानवीदु:खोंकागूढ़संभवहै।मैंइससमयमेंवनश्चयहीअवतथरऔरअतथायीकीखोिमेंपड़ाहुआहाँ"।रािकुमारकेमनमेंयहअन्तःसंघर्िउन्नतीस(29)वर्िकीआयुमें,उसकेपुत्रराहुलकेिन्मलेनेकेसमयतक,अबाधगवतसेचलतारहा।तबउसनेरािमहलत्यागनेकावनणियवलया।रािकुमारकेइससंघर्िकाचरमोत्कर्िगॄहत्यागकरप्रववितहोनेकेउसकेवनश्चयकेरुपमेंहुआ।तथावपगॄहत्यागकरभीउनकेमनोमंथनका-3-─3─

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शमननहींहुआ।मार(शैतान)तुरन्तउसकेपीछेपड़गयाऔरलुभानेलगा:"रािकुमारतुमरािमहललौटिाओ।समयकीप्रतीक्षाकरो।सारासंसारिल्दहीतुम्हारेचरणोंमेंहोगा"।ककन्तुरािकुमारनेशैतानसेकहाककमैंपॄथ्वीकीककसीभीवततुकीअपेक्षानहींकरता।औरवहअपनावसरवहलातेहुएमुड़गयाऔरवभक्षापात्रलेकरदवक्षणकदशाकीओरचलकदया।सविप्रथमरािकुमारनेभॄगुॠवर्केआश्रममेंिाकरतपतयाकी।उसकेपश्चातआरादाकालामतथाउद्रकरामपुत्रकेपासिाकरउनसेध्यानसमावधऔरमोक्ष-प्राविकेउपायसीखेऔरउनकीसाधनाकी।ककन्तुशीघ्रहीउन्हेंपताचलगयाककइससेवनवािणकीप्राविनहींहोसकती।तबवेमगधचलेगएऔरवहााँउन्होंनेनैरंिनानदीकेतटपरउरूवेलावनमेंघोरतपतयाकी।वहसचमुचउग्रतपतयाथी।िैसाककगौतम(बुद्ध)नेतवयंसेकहा:"भूत,वतिमानयाभववष्यकेककसीतपतवीनेइतनीउग्रतपतयानतोकीहै,नकोईइसकेपश्चात्करपाएगा।"ऐसीघोरतपतयाथीउनकी।कफरभी,इसतपतयासेरािकुमारकोवहवततुप्रािनहोसकीविसकीउन्हेंखोिथी।तबउन्होंनेछः(6)वर्िकीइसतपतयाकोवनवमर्मात्रमेंत्यागकदया।नैरंिनानदीमेंस्नानकर,शरीरकोवनमिलककयाऔरसुिातानामककन्याकेहाथसेखीरकापात्रग्रहणकरतवातथ्य-लाभककया।वहअभीभीकमज़ोरथे,वहशांवतसेएकवॄक्षकेनीचेआसनलगाकरबैठगएऔरप्राणप्रणसेउन्होंनेअवन्तमध्यानमेंप्रवेशककया।"चाहेमेरारिक्योंनसूखिाए,मााँसक्योंनझड़़िाए,हवियााँक्योंनगलिाए,मैंसम्यक्संबोवधप्रािककएवबनाइसआसनकोनहींछोडूाँगा।"यहथारािकुमारकादॄढ़संकल्प।रािकुमारकेहॄदयमेंिोभीर्णसंघर्िचलरहाथा।वहअतुलनीयथा।संभ्रात,ववमूढ़मन,उद्धेगकारीव्यग्रता,हॄदयपरछाईहुईथी।कालीउदासघटा,ववदुपववचारोंकीवघनौनीआकॄवतयााँ-मानोमार-सेनाकाप्रबलआक्रमणहीथा।रािकुमारने-4-─4─

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हॄदयकेकोने-कोनेमेंउनकापीछाककयाऔरअलग-अलगउनसेयुद्धकरउन्हेंपरावितककया।सचमुचवहखूनकोसुखानेवाला,मााँसकोक्षत-ववक्षतऔरहवियोंकोचूर-चूरकरनेवालाभीर्णसंग्रामथा।ककन्तुयहयुद्धभीसमािहोगयाऔरपौफटनेपरिबरािकुमारनेप्रभात-तारेकीओरगदिनउठाकरदेखातबउनकाहॄदयप्रकाशमयहोगयाथा।उन्होंनेसंबोवधकोप्रािकरवलयाथा,वेबुद्धबनगएथे।रािकुमारकीआय़ुउससमय35(पैंतीस)वर्िकीथीऔरवहकदनथा8(आठ)कदसंबरकासवेरा।वववभन्नसूत्र,सुखमाला-सुत्त,अररपररयेसन-सुत्त-5-─5─

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बुद्धबुद्धकाआध्यावत्मकहॄदयबुद्धकाहॄदयपरमकारुवणकहै।सभीप्रकारकेउपायोंसे,सबसत्त्वों(इंसानों)काउद्धारकरनेवाला,यहपरमकारुवणकहॄदय-बीमारोंकेसाथबीमारहोनेवाला,पीवड़तोंकेसाथपीवड़तहोनेवालाहॄदयहै।बुद्धकहतेहैकक"तुम्हारादु:खमेरादुखहै,तुम्हारासुखमेरासुखहै",औरिैसेएकमााँअपनेबच्चेकाख्यालकरतीहै,ठीकवैसेहीएकक्षणभीछोड़करचलेनिानेवाला,साँभालनेवाला,पालन-पोर्णकरनेवाला,उद्धारकेवलयेहाथबढ़ानेवालाहीबुद्धकाहॄदयहै।बुद्धकीमहाकरूणाकी,सत्त्वोंकीआवश्यकताओंकेअनुसारउत्पवत्तहोतीहै।इसमहाकरूणाकेतपशिसेहॄदयमेंश्रद्धाउत्पन्नहोतीहै,श्रद्धावानहॄदयकेकारणवनवािणकामागिखुलिाताहै।यहठीकवैसाहीहै,िैसेबच्चेकोप्यारकरनेसेमााँकाअपनेहीमातॄत्वसेसाक्षात्कारहोताहैऔरमााँकेवत्सलहॄदयकेतपशिसेबच्चेकाहॄदयआश्वासनप्रािकरताहै।कफरभीलोगभगवानबुद्धकेइसहॄदयकोनहींिानते,औरअज्ञानकेकारणमोहग्रततहोकरपरेशानहोतेहैंऔरववववधक्लेशोंकेआधीनव्यवहारकरकेदु:खीहोतेहै।पाप-कमोंकीभारीगठरीवसरपरउठाकर,हााँफते-हााँफते,मोहकेएकपवितसेदूसरेपवितपरभटकतेरहतेहैं।अवभतायुध्यािन,ववमलकीर्तिवनदेश-सूत्र,शूरंगम-सूत्र,महापररवनवािण-सूत्रकरुणा(慈悲)-6-─6─

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बुद्धमहाप्रवणधान(महासंकल्प)बुद्धकीकरूणाकेवलइसीिन्मकेवलएहै,ऐसामाननाठीकनहींहै।यहतोबहुतपहलेसे,िबसेमनुष्यअज्ञानवशिन्म-मॄत्युकेफेरेमेंफाँसकरमोहपरमोहकेपुटचढ़ाताआया,तभीसेचलीआरहीहै।बुद्धसदालोगोंकेसामने,लोगोंकासबसेवप्रयतवरूप(आकार)लेकरप्रकटहोतेरहतेहैंऔरउद्धारकेसभीउपायउन्हेंसुलभकरादेतेहै।शाक्य-वंशमेंरािकुमारकेरूपमेंिन्मलेकरभी,घरकीसुख-सुववधाओंकोछोड़करउन्होंनेवैराग्यकोअपनाया,उग्रतपतयाकी,धमिकासाक्षात्कारककया,धमिकाउपदेशकदयाऔरअन्तमेंमॄत्युकेअधीनहोकर,मॄत्युकेसत्यकादशिनकराया।सत्त्वों(इंसान)केमोहकीकोईसीमानहींहै,इसवलएबुद्धकेउद्धारकायिकीभीकोईसीमानहींहै।सत्त्वों(इंसान)केपापोंकीकोईथाहनहींहोती,इसवलएबुद्धकीकरूणाभीअथाहहोतीहै।इसवलएभगवानबुद्धनेअपनीसाधनाकेआरंभमेंचारमहाप्रवणधान(महासंकल्प)ककएथे।1:-प्रवतज्ञापूविकसबसत्त्वों(इंसान)काउद्धारकरना।2:-प्रवतज्ञापूविकसबक्लेशोंसेमुविपाना।3:-प्रवतज्ञापूविकसबउपदेशोंकाअध्ययनकरना।4:-प्रवतज्ञापूविकअनुत्तर-सम्यक्संबोवधकोप्रािकरना।इसचारप्रवतज्ञाओंकेआधारपरबुद्धनेसाधनाकीथी।बुद्धकीसाधनाकेआधारयेचारप्रवणधानहैं,विनसेज्ञातहोताहैककप्रेमऔरकरूणाकीअवभव्यविहीबुद्धत्वकीमूलप्रकॄवतहैंबुद्धकाहॄदयसत्त्वों(इंसानों)काउद्धारकरनेकीइच्छारखनेवालीउनकीमहाकरूणाहीहैसद्धमिपुण्डरीक-सूत्र,महायान-िातक-वचत्तभूवमपरीक्षासूत्र-8-─8─

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धमिभगवानबुद्धकेउपदेशसम्यक्संबोवधकीकामनाकरनेवालोंकोआचरणकेतीनमागोंकोसमझलेनाचावहएऔरउनकाअनुसरणकरनाचावहए:-पहलाहै-शीलोंकापालन,दूसराहै-ध्यानकीसाधना,तीसराहै-प्रज्ञाकाववकास।शीलक्याहै?हरएकको,चाहेवहवभक्षुहोयाउपासक,शीलोंकापालनकरनाचावहए।उसेअपनेवचत्तऔरशरीरकोवनयंवत्रतकरपााँचइवन्द्रय-द्वारोंकीसदैवरखवालीकरनीचावहए।उसेछोटेसेछोटेपापकरनेसेभीडरनाचावहएऔरहरक्षणकेवलसदाचरणकरनेकाप्रयासकरतेरहनाचावहए।ध्यानकाक्याअथिहै?उसकाअथिहैवचत्तमेंलोभऔरपाप-वासनाएाँउठतेहीउनकात्यागकरनाऔरवचत्तकोपववत्रऔरशान्तरखना।प्रज्ञाक्याहै?वहहैचारआयिसत्योंकासम्यक्-आकलनऔरउनकाधैयिपूविकपालन।यहदुःखहै,यहदुःखसमुदयहै,यहदुःखवनरोधहैऔरयहदुःखवनरोधगावमनीप्रवतपदाहै-इसप्रकारतपष्टरूपसेसाक्षाकारकरनाचावहए।िोइनतीनमागोंकाआतथासेअनुसरणकरतेहैंवेहीबुद्धभगवानकेसच्चेवशष्यकहलातेहैं।ववनयमहावग्ग,संयुिवनकाय,धम्मचक्रप्रवतिन-सुत्त-10-─10─

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धमिहेतु-अवतथा(पररवतथवत-अवतथा)विसप्रकारहेतु(पररवतथवत)प्रावणयोंकेदुःखकाकारणहै,तथाउनदुःखोंकेववमोक्षकेवलएसाधनाकारणबनतीहै,वैसेहीसभीवततुएाँहेतु(पररवतथवत)केहोनेसेउत्पन्नहोतीहै,हेतुकेनष्टहोनेसेवततुएाँनष्टहोतीहै।वर्ािकाहोना,हवाकाचलना,फूलोंकावखलना,पत्तोंकाझड़नासभीहेतु-वनभिरहैऔरहेतुकेअभावसेसमािहोिातेहैं।यहशरीरभीमाता-वपताकेहेतुसेपैदाहोकर,अन्नसेपररपुष्टहोताहै,तथायहवचत्तभीअनुभवऔरज्ञानकेकारणसुसंतकॄतहोताहै।अतः,यहशरीरऔरवचत्तदोनोंहीहेतु-वनभिरहैंऔरहेतु-पररवतिनसेपररवर्तितहोतेरहतेहैं।िालअनेकग्रंवथयोंसेबनाहोताहै।येग्रंवथयााँपरतपरिुड़करिालबनातीहैं,वैसेहीइसससांरकीसभीवततुएाँपरतपरिुड़ीहुईहैं।िालकीकेवलएकग्रंथीकोिालमाननायािालसेतवतंत्रमाननाबहुतबड़ाभ्रमहै।िाल,इसवलएिालहैककवहकईग्रंवथयोंकेआपसमेंिुड़ेहोनेसेबनाहै।औरिालकीहरग्रंवथएक-दूसरेसेसंबद्धऔरगुंकफतहै।अवतंसकसूत्रलंकावतार-सूत्र-14-─14─

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संघमागिकाअनुसरणकरनाएकबार,सुधननामकएकलड़काथा।सम्यक्संबोवधप्रािकरनेकीइच्छासे,प्रेररतहोकर,वहएकाग्रहोकर,मागिकीखोिकरनेलगा।एकमछुएसेउसनेसमुद्रकाज्ञानप्रािककया।एकवचककत्सकसेउसनेकष्टपीवड़तरोवगयोंकेप्रवतकरूणासेव्यवहारकरनासीखा।एकधनीसेउसनेसीखाकककौड़ी-कौड़ीबचानाहीधनीहोनेकारहतयहैऔरइससेउसेयहसमझमेंआगयाककवनवािणकेपथपरछोटी-सीउपलवब्धकोभीहाथसेनिानेदेनाककतनाआवश्यकहै।एकध्यानमागीवभक्षुसेउसनेसीखाककपववत्रऔरशान्तमनमेंदूसरोंकेमनकोपववत्रताऔरशावन्तदेनेकीककतनीचमत्कारीशाविहोतीहै।एककदनककसीअसाधारणव्यवित्ववालीमवहलासेउसकीभेंटहोगईऔरउसकेपरोपकारीतवभावसेप्रभाववतसुधननेसीखाककपरोपकारज्ञानकाहीफलहै।एकबारककसीवॄद्धपररव्रािकसेउसकीभेंटहुई,विसनेउससेकहाककलक्ष्यतकपहुाँचनेकेवलएतुम्हेंतलवारोंकापहाड़लााँघकरिानाहोगाऔरअविकीघाटीमेंसेगुिरनाहोगा।इसप्रकारसुधननेअपनेअनुभवसेसीखाककउसनेिोभीदेखायासुनावहसबसदुपदेशहीथा।एकगरीब,अपंगस्त्रीसेउसनेधैयिकीवशक्षाली।राततेमेंखेलतेहुएबच्चोंकोदेखकरउसनेसहिआनन्दकापाठसीखा।कुछसौम्यएवंववनम्रतवभावकेलोगोंसे,िोदूसरोंद्वाराइवच्छतवततुओंकीकभीचाह(इच्छा)नहींरखतेथे,उसनेसंसारकेसभीलोगोंकेसाथवमल-िुलकररहनेकारहतयसीखा।सुगन्ध(महक)केवलएअलग-अलगद्रव्योंकेवमश्रणकोदेखकरउसनेसामंितयकासबकसीखाऔरफूलोंकीसिावटकेद्वाराधन्यवादज्ञापनकीवशक्षाप्रािकी।एककदन,वनमेंसेगुिरतेहुएवहएकवॄक्षकेनीचेआरामकरनेबैठगयाऔरउसनेदेखाकक-22-─22─

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संघअवततत्वहीनसरसोंकेबीिएकबारएकयुवामवहलाकॄशागौतमी,िोककएकधनवानव्यविकीपत्नीथी,िोअपनेइकलौतेपुत्रकीमॄत्युकेकारणपागलहोगईथी।उसनेमॄतबच्चेकोअपनीगोदमेंउठावलया।"क्याऐसाकोईनहींहैिोमेरेइसबच्चेकोठीककरसके?"पूछतीहुईदर-दरभटकनेलगी।कोईभीउसकेवलएकुछनहींकरपाया।ककन्तुअन्तमेंबुद्धकेएकउपासकनेउसेभगवानबुद्धकेपासिानेकीसलाहदी,िोउससमयिेतवनमेंववहारकररहेथे।इसवलएवहमॄतबच्चेकोबुद्धकेपासलेगई।भगवाननेसहानुभूवतसेउसकीओरदेखाऔरकहा,"इसबच्चेकोठीककरनेकेवलएमुझेकुछपीलीसरसोंकेदानोंकीआवश्यकताहोगी।िाऔरविसघरमेंकोईमरानहोऐसेघरसेपीलीसरसोंकेचार-पााँचदानेलेआ।"तबवहपगलीऐसाघरढ़ूाँढ़नेचलदीविसमेंकोईनमराहो;ककन्तुव्यथि।अन्तमेंवहभगवानबुद्धकेपासलौटनेकेवलएबाध्यहोगई।उनकेशांत-सौम्यसावन्नध्यमें,पहलीबारउनकेवचनोंकाअथिउसकीसमझमेंआयाऔरउसेलगाककिैसेवहतवप्नसेिागउठीहै।वहबच्चेकेशवकोलेगई,उसकादाह-कमिककयाऔरकफरबुद्धकेपासलौटकरउनकीवशष्याबनगई।थेरीगाथाअटठ्कथा-24-─24─

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संघहॄदयकीहेकड़ीमानलीविएकककोईआदमीवनमेंवॄक्षकेतनेकेभीतरकागूदालेनेकेवलएिाएऔरशाखाओंऔरपत्तोंकाभारलेकरलौटेऔरयहमानबैठेककविसचीज़केवलएवहगयाथा,वहप्रािहोगई,गूदेकेबदलेछालऔरटहवनयााँपाकरसंतोर्करलेतोक्यायहउसकीमूखितानहोगी।ककन्तुयहीबातअवधकतरलोगकररहेहैं।कोईमनुष्यिन्म,बुढ़ापा,व्यावधऔरमृत्युअथवाशोक,ववलाप,दु:खऔरपीड़ासेमुविकदलानेवालेमागिपरचलनेलगताहै,औरथोड़ीदूरचलकर,साधनामेंकुछप्रगवतहोतेही,एकदमघमंड़ी,आत्मश्लाधीऔरहेकड़बनिाताहै।यहउसीआदमीकेसमानहैिोगूदापानेकेवलएगयाऔरटहवनयोंऔरपत्तोंकेभारसेसंतोर्मानकरलौटआया।दूसरामनुष्यथोड़ेसेप्रयाससेिोकुछप्रगवतहुई।उसीसेसंतोर्मानकरसाधनामेंढीलदेताहैऔरघमंड़ी,आत्मश्लाधीऔरहेकड़होिाताहैतोयहमनुष्यभीगूदेकेबदलेटहवनयोंकाभारउठाकरलौटनेवालेमनुष्यकेसमानहै।औरभीएकमनुष्यहै,िोअपनेमनकोशांतऔरववचारोंकोशुद्धहोतेहुएदेखकरसाधनामेंढीलापड़िाताहैऔरघमंड़ी,आत्मश्लाधीऔरहेकड़होिाताहै;वहभीगूदेकेबदलेमेंवॄक्षकीछालकाभारढोरहाहोताहै।वनवािणकीकामनाकरनेवालोंकाकायिआसाननहींहोता;उन्हेंइसमागिमेंआदर,मानऔरप्रवतष्ठाकीअपेक्षानहींकरनीचावहए।सबसेपहलेतोहमेंिन्म-मरणवालेइससंसारमेंवाततववकतवरुपकोसही-सहीसमझनाहोगा।मवज्झमवनकाय,महासारोपम-सुत-28-─28─

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संघसातप्रकारका(दान)अपिणधनवाननहोतेहुएभीसातप्रकारकेदानआसानीसेकदएिासकतेहैं।पहलाहै-:शरीर-दान-यहअपनेशारीररकपररश्रमद्वाराकदयािासकताहै।इसकासविश्रेष्ठप्रकारअपनेिीवनकोसमर्पितकरनाहै।दूसराहै-:हॄदय-दान-इंसानकोकरूणापूविकहॄदयसेदूसरोंकेसाथपेशआना।तीसराहै-:नेत्र-दान-प्रेमपूणिदॄवष्टसेसबकीओरदेखना,विससेउनकामनप्रसन्नहोउठे।चौथाहै-:मुखाकॄवत-दान-सौम्यमुखाकॄवतसेसदामुतकरातेहुएसबकेसाथव्यवहारकरना।पाचाँवाहै-:वाणी-दान-दूसरोंसेसहॄदयऔरप्यार-भरेशब्दोंमेंबातकरना।छ्ठाहै-:आसन-दान-अपनाआसनदूसरेकोबैठनेकेवलएदेना।सातवााँहै-:आश्रयदेना-दूसरोंकोएकरातअपनेघरपरवबतानेदेना।इसप्रकारकेदानकोईभीअपनेदैवनकिीवनमेंकरसकताहै।संयुिरत्नवपटक-सूत्र-30-─30─

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अपनेवलएआत्मदीपबनोअपनेवलएआत्मशरणबनोभगवानबुद्धनेकुशीनगरकेबाहरशाल-उपवनमेंअपनाअंवतमउपदेशककया।"वभक्षुओं,आत्मदीपबनो,आत्मशरणबनो,ककसीदूसरेपरआवश्रतमतरहो।धमिदीपबनो,धमिशरणबनो।दूसरेउपदेशोंपरआवश्रतमतरहो।"अपनेशरीरकोदेखो।उसकेमलोंकाख्यालकरउसकेप्रवतआसविमतरखो।उसकीवेदना,उसकाआनंदसभीदु:खोंकामूलबनतेहै,उनकेप्रवतहमआसिकैसेहोसकतेहैं?अपनेहॄदयकोदेखोउसमेंआत्मा-िैसीकोईवततुनहींहैयहिानकर,उसकेमोहमेंफाँसनानहींचावहए।ऐसाकरनेसेहमसभीदु:खोंकावनवारणकरसकतेहैं।इससंसारसेमेरेचलेिानेकेबादभी,तुमलोगइसप्रकारमेरेउपदेशकापालनकरतेरहो।तभीतुममेरेसच्चेवशष्यकहलाओगे।"वभक्षुओं,अबतकमैंनेतुमलोगोंकेवलएिोधमिऔरववनयकेउपदेशकदएहैं,उन्हेंसदासुनतेरहो,उनपरववचारकरतेरहो,उनकाआचरणकरतेरहो।उनकात्यागकभीनहींकरनाचावहए।अगरतुमउनकेअनुसारआचरणकरतेरहोगे,तोतुम्हारािीवनसदासुखसेपररपूणिहोगा।"उपदेशकीकुंिीहै-अपनेहॄदयपरकाबूपाना।इसवलएवासनाओंकोसंयवमतकरकेअपने-आपपरववियपानेकाप्रयासकरतेरहो।शरीरकोपववत्ररखो,मनकोशुद्धरखो,सदासत्यवचनबोलो।लोभकात्यागकरो,क्रोधमतकरो,पापसेदूररहो,औरसदाअवनत्यताकावचन्तनकरतेरहो।"अगरहॄदय(मन)मोहकेवशहोकर,लोभकावशकारबननेकीनौबतआिाए,तोउसकादॄढ़तापूविकदमनकरनाचावहए।हॄदयकेदासनबनकर,हॄदयकेतवामीबनो।-32-─32─

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"मनुष्यकाहॄदयउसेबुद्धभीबनासकताहैऔरपशुभीबनासकताहै।मोहमेंफाँसकरवहराक्षसबनताहै,औरवनवािणप्रािकरवहबुद्धबनताहै।यहसबहॄदयकाखेलहै।इसवलएहॄदयपरवनयंत्रणरखकर,उसेसच्चेपथसेववचवलतनहोनेदेनेकाप्रयासकरतेरहो।"वभक्षुओं,तुमलोगोंकोमेरेधमिकापालनकरतेहुएआपसमेंवमलिुलकररहनाचावहए,एक-दूसरेकाआदर-सत्कारकरनाचावहए,आपसमेंझगड़नानहींचावहए।पानीऔरदूधकेसमानएक-दूसरेमेंघुलवमलिाओ।पानीऔरतेलकेसमानएक-दूसरेकोनकारनानहींचावहए।"सबवमलकरधमिकीरक्षाकरो,वमलकरअध्ययनकरो,वमलकरउसकाआचरणकरो,एक-दूसरेकोप्रोत्सावहतकरतेहुए,साधनाकाआनन्दएकसाथलूटो।बेकारबातोंकीओरध्यानदेकर,व्यथिबातोंमेंसमयबबािदनकरो।वनवािणकेपुष्पकोतोड़कर,सच्चेपथकेफलकोहततगतकरो।"वभक्षुओं,इसधमिकातवयंसाक्षात्कारकरके,मैंनेतुमलोगोंकोउसकाउपदेशकदयाहै।तुमलोगइसकीठीकसेरक्षाकरोऔरउसकाअनुकरणकरतेहुएआचरणकरतेरहो।"अतःिोइसउपदेशकेअनुसारआचरणनहींकरते,वेमुझसेवमलकरभीनहींवमले,मेरेसाथरहकरभीमुझसेदूरहटेहुएहै।दूसरीओरइसउपदेशकेअनुसारआचरणकरनेवालामुझसेदूररहतेहुएभीमेरेवनकटरहताहै।"वभक्षुओं,मेराअन्तअबबहुतवनकटहै।हमाराववयोगअबदूरनहींहै।कफरभीशोकमतकरो।यहसंसारअवनत्यहै,यहााँऐसाकोईनहींिोिन्मलेकरमरतानहीं।अबमेराशरीरभीिििरशकटकेसमानटूटिाएगा,यहभीइसवलएहोगाककअवनत्यताकेवसद्धान्तकोमैंअपनेशरीरकोलेकरकदखासकूाँ।"व्यथिशोकमतकरो।अवनत्यताकेइसवसद्धान्तकोध्यानमेंरखकर,मनुष्य-िीवनकेसच्चेरूपकोआाँखेंखोलकरदेखनाचावहए।-33-─33─

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उसकोसच्चेअथिमेंसमझनाचावहए।िोवनत्यपररवतिनशीलहै,उसेअववकायिबनानेकाप्रयासकरनाव्यथिहै।"संसाररकक्लेशोंकेराक्षससदाअवसरपाकरतुमलोगोंपरआक्रमणकरनेकेवलएतुलेहुएहै।यकदतुम्हारेकमरेमेंववर्ैलासााँपरहताहो,तोिबतकउसेकमरेसेबाहरवनकालनहींदोगे,तबतकचैनकीनींदनहींसोसकोगे।"क्लेशोंकेराक्षसोंकापीछाकरनाचावहए।क्लेशोंकेसााँपकोवनकालदेनाचावहए।तुमलोगोंकोप्रयत्नपूविकअपनेमनकीरक्षाकरनीहोगी।"वभक्षुओं,अबमेरीअवन्तमघड़ीहै।ककन्तुयहभूलनानहींचावहएककयहमॄत्युकेवलशरीरकीमॄत्युहोगी,क्योंककशरीरमाता-वपतासेपैदाहोताहैऔरअन्नद्वाराउसकापोर्णहोताहै,उसकाव्यावधग्रतत(बीमार)होनाऔरनष्टहोिानाअपररहायिहै।"ककन्तुबुद्धकावाततववकतवरूपशरीरनहीं,अवपतुवनवािणहोताहै।शरीरकेनष्टहोिानेपरभीवनवािण,धमिऔरसाधनाकेरूपमेंअनंतकालतकिीववतरहताहै।इसवलएिोकेवलमेरेशरीरकोदेखताहै,वहसच्चेअथिमेंमुझेनहींदेखता।िोमेरेधमिकोिानताहैवहीसचमुचमुझेदेखताहै।"मेरेदेहान्तकेबाद,मेराउपदेवशतधमिहीतुमलोगोंकाशातता(मागिदशिक)होगा।इसधमिकाअनुसरणकरनाहीतथागत(बुद्ध)कीसेवाकरनाहै।"वभक्षुओंमुझेअपनेिीवनकेअंवतमपैंतालीस(45)वर्ोंमेंिोकुछधमि-उपदेशदेनेचावहएथे,मैंसबदेचुकाहाँ,औरिोकुछकरनाचावहएथा,मैंसबकरचुकाहाँ।धमोंमेंतथागत(बुद्ध)कीकोईआचायि-मुवष्ट(रहतय)नहींहै।तथागत(बुद्ध)नेसभीउपदेशतपष्ट,अगुिऔरअकूटककएहै।तथागत(बुद्ध)नेकुछभीवछपाकरनहींरखा।"वभक्षुओं,अबमेरीअवन्तमघड़ीहै।मेराअबपररवनवािणहोगा।यहीमेराअंवतमउपदेशहै।"-34-─34─पररवनब्बान-सुत्त,महापररवनब्बान-सुत्त

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*बौद्धधमि-प्रवतिन-प्रवतष्ठान:बौद्धधमिकेप्रचार-प्रसारकीसंतथा।*बौद्धधमि-प्रवतिन-प्रवतष्ठान:"श्रीएहाननुमाता”नेपूरीदुवनयामेंबौद्धववचारकाप्रचारऔरप्रसारकरनेकासंकल्पवलयाऔर1965मेंइसीउद्देश्यकेसाथ"बौद्धधमि-प्रवतिन-प्रवतष्ठान”कीतथापनाकी।िोककवतिमानसमयमें’सावििवनकिनवहतसंतथा’केरूपमेिापानसरकारसेमान्यताप्रािहै।यहबौद्धधमिकीभावना,बौद्धसंतकॄवतऔरउसकेअकादवमकपदोन्नवतकोबढ़ावादेताहै,यहलोगोंमेंमानवीमनकीप्रज्ञा,करूणा,सहानुभूवततथाएकसाथरहनेकीभावनाकोिागॄतकरताहै,साथहीसमॄद्धसमािकेवनमािणमेंयोगदानदेताहै।यहसंतथाअपनेइसलक्ष्यकोववकवसतकरनेमेंसदैवअग्रसरहै।*बौद्धधमि-प्रवतिन-प्रवतष्ठानकेकायि-कलाप-:*बौद्धधमिकीवशक्षाऔरसहायताकेवलएअग्रणी(तत्पर)रहना।*बौद्धधमिकीवशक्षाकोबढ़ावादेनेकेवलएप्रमुखववदेशीमहाववद्यालयमें"नुमाताबौद्धवशक्षा"कीतथापनाएवम्प्रोत्साहनदेना।*"बौद्धधमि-प्रवतिन-प्रवतष्ठान"संतकॄवतपुरतकारकाआयोिनकरना।*प्रवतवर्िउनलोगोंको"बौद्धधमिप्रचारकसंतकॄवत"पुरतकारप्रदानकरना,विन्होंनेवववभन्नक्षेत्रोंमेंबौद्धधमिआध्यावत्मकसंतकॄवतकेववकासमेंयोगदानकदयाहै।*बौद्धसंगीतकाआधुवनकीकरणऔरप्रचारकरना।*बौद्धधमि-ग्रन्थोंकाप्रचार-प्रसारकरना।*संगीत-कायिक्रमऔरसंगीत-प्रवतयोवगताकाआयोिनकरना।औरबौद्धसंगीतकासामान्यरूपसेववततारकरनेकेवलएकईकायिक्रमोंकाआयोिनकरना।*"सूत्रों"काअंग्रेिीमेंअनुवादकरना।*यहसंतथाचीनीवणिमालामेंवलखेहुएसूत्रोंकोसंगरठतकरके"बौद्धधमि-ग्रन्थों"कासरलअंग्रेिीमेंअनुवादकररहीहै।ताककअवधकसेअवधकलोगमहानशातताकेउपदेशामॄतसेलाभांववतहोसके।यहइससंतथानकीहार्दिकआकांक्षाहै।*योग्यछात्रोंकोछात्रवॄवतप्रदानकरना।*बौद्धधमिकाअध्ययनकरनेवालेराष्ट्रीयऔरअंतरराष्ट्रीयछात्रोंकोछात्रवृवत्तयााँप्रदानकरना।छात्रवॄवत्तयााँप्रािककएहुएअवधकतरछात्रबौद्धधमिअध्ययनकेअग्रणीववशेर्ज्ञोंकेरूपमेंपूरेववश्वमेंसकक्रयरूपसेकायिरतहै।-36-─35─

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बौद्धधमि-प्रवतिन-प्रवतष्ठानकेप्रवासीसहयोगसंगठन:(BDKAffiliatedOrganization)BDKAmericahttp://www.bdkamerica.orgBDKCanadaE-mail:honjo@bdkcanada.comhttp://www.bdkcanada.comBDKHawaiiE-mail:bdkshi@hotmail.comhttp://www.bdkhawaii.comBDKMexicoE-mail:bdkmexico@prodigy.net.mxBDKEurope(EKŌ-HausderJapanischenKulture.V.)E-mail:eko@eko-haus.dehttp://www.eko-haus.deBDKAsiaE-mail:bdk@mitutoyo.com.sgBDKU.K.E-mail:BDK.UK@mitutoyo.co.ukBDKTaiwanE-mail:bdktaiwan@yahoo.comBDKPolandE-mail:j.urszkowski@mitutoyo.plBDKSouthAmericaE-mail:bdk@mitutoyo.com.br-37-─36─

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